रिपोर्ट – कुमार संदीप
मुजफ्फरपुर। परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि मन में अटूट विश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो सफलता स्वयं रास्ता बना लेती है। इसी सत्य को अपने जीवन से चरितार्थ किया है वैशाली की बेटी एवं चर्चित साहित्यकार सविता राज ने। संघर्ष, धैर्य और साहित्य साधना के बल पर उन्होंने न केवल अपनी अलग पहचान बनाई, बल्कि अनेक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनी हैं।
18 जून 1981 को वैशाली में जन्मी सविता राज ने प्रारंभिक शिक्षा मुजफ्फरपुर में प्राप्त की। एम.डी.डी.एम. कॉलेज से इंटर एवं स्नातक तथा आर.डी.एस. कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की शिक्षा पूरी की। बचपन से ही साहित्य के प्रति गहरी रुचि रखने वाली सविता राज की कविताएँ और लेख विभिन्न समाचार-पत्रों के बाल-अंक में प्रकाशित होते रहे। कॉलेज पत्रिका दर्शना में भी उनकी रचनाओं को विशेष स्थान मिला तथा “आज़ादी : कल, आज और कल” विषय पर उनके निबंध को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ।
विवाह के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण लगभग 16 वर्षों तक उनकी साहित्यिक यात्रा थम-सी गई। इसके बावजूद उन्होंने अपनी रचनात्मक ऊर्जा को जीवित रखा। कोरोना संक्रमण जैसी गंभीर चुनौती का सामना करने के बाद उन्होंने साहित्य को नए जीवन का उद्देश्य बनाया और पुनः सक्रिय लेखन आरंभ किया।
उनके साहित्यिक पुनरागमन में ललित नारायण महाविद्यालय के कवि सम्मेलन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंच पर वर्षों बाद प्रस्तुत उनकी कविता “बादल” को सराहना और सम्मान मिला। इसके बाद उन्होंने कविता, गीत, ग़ज़ल, कहानी, आलेख और लघुकथा जैसी अनेक विधाओं में निरंतर लेखन करते हुए अपनी सशक्त पहचान स्थापित की।
सविता राज की रचनाएँ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं, प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों तथा साझा संकलनों में प्रकाशित हो चुकी हैं। हिंदी और बज्जिका दोनों भाषाओं में उनका लेखन समान रूप से सराहा जाता है। वे सामयिक परिवेश ई-पत्रिका से संपादकीय दायित्व निभा रही हैं तथा कई साहित्यिक संकलनों का सफल संपादन भी कर चुकी हैं।
बिहार सरकार के तत्वावधान में आयोजित अनेक कवि सम्मेलनों के सफल संयोजन एवं संचालन के साथ-साथ आकाशवाणी पटना और दूरदर्शन पर उनके काव्य-पाठ एवं वार्ताओं का प्रसारण भी हो चुका है। उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए उन्हें बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन सहित अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
वर्तमान में उनके हिंदी कविता-संग्रह, ग़ज़ल-संग्रह एवं बज्जिका कविता-संग्रह प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं। साहित्य जगत को इन कृतियों का बेसब्री से इंतजार है।
मुजफ्फरपुर के युवा नवोदित साहित्यकार कुमार संदीप ने कहा कि सविता राज का जीवन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि संघर्ष कभी प्रतिभा को पराजित नहीं कर सकता। दृढ़ इच्छाशक्ति, परिवार का सहयोग और निरंतर साहित्य साधना ने उन्हें उस मुकाम तक पहुँचाया है, जहाँ आज वे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का पर्याय बन चुकी हैं। यह कहना बिल्कुल ग़लत नहीं होगा कि-“जहाँ संघर्ष हार गया, वहाँ सविता राज जी जीत गईं।”




