हिंदी की उन्नति से ही जीवन की सद्गति : डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’
रिपोर्ट -कुमार संदीप
मुजफ्फरपुर। हिंदी भाषा के प्रति सम्मान, अनुराग और उसके व्यापक प्रचार-प्रसार के संकल्प के साथ सोमवार, 14 सितंबर को मुरौल प्रखंड के रैनी ग्राम स्थित साहित्य सदन में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय तुलसी साहित्य विकास एवं नव काव्य सृजन परिषद, साहित्य सदन रैनी, मुजफ्फरपुर के सौजन्य से किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, साहित्यकार, शिक्षक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परिषद के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा वरिष्ठ कवि-साहित्यकार डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’ ने हिंदी भाषा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “हिंदी की उन्नति से ही जीवन की सद्गति है।” हिंदी दिवस की वास्तविक सार्थकता तभी सिद्ध होगी, जब हिंदी केवल समारोहों और आयोजनों तक सीमित न रहकर हमारे दैनिक जीवन, व्यवहार, शिक्षा, सामाजिक सरोकारों तथा सार्वजनिक जीवन का स्वाभाविक माध्यम बने।
डॉ. विजय कुमार पाठक ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और हमारी सामूहिक चेतना की आत्मीय अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि भाषा के विकास के साथ ही समाज की वैचारिक और सांस्कृतिक चेतना का विकास संभव है। हिंदी के सुदृढ़ होने से सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक तथा स्वस्थ आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने परिवार, समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए हिंदी को हृदय से अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर समाजसेवी एवं शिक्षाविद सतीश कुमार पाठक ने हिंदी साहित्य के समृद्ध इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी साहित्यकारों ने विभिन्न कालखंडों में अपनी साधना, सृजन और साहित्यिक योगदान से हिंदी को निरंतर समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि हिंदी के विकास में अपना जीवन समर्पित करने वाले साहित्यकारों के योगदान को स्मरण करना और उनकी साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाना हम सभी का दायित्व है।
समारोह में समाजसेवी हेमंत झा, शिक्षक रंजीत पाठक, कुणाल कुमार, किशोर कुमार पाठक, सुभाष पाठक, शिक्षाविद शंकर पाठक, विनोद कुमार पाठक, हर्षित राज, शिवांश वत्स, वाणी सौम्या सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में परिषद के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’ ने समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों, साहित्यकारों, शिक्षकों, शिक्षाविदों एवं समाजसेवियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। हिंदी दिवस का यह आयोजन हिंदी के प्रति प्रेम, गौरव और उसके सतत संवर्धन के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।




