नारी शक्ति और साहित्य साधना का अद्भुत संगम : एम. एस. केशरी पब्लिकेशन के स्थापना दिवस पर भव्य कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह

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मुजफ्फरपुर। रिपोर्ट -कुमार संदीप, एम. एस. केशरी पब्लिकेशन के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित विशेष साहित्यिक कार्यक्रम “एक पेड़ साहित्य के नाम” के अंतर्गत देशभर के साहित्यप्रेमियों एवं सदस्यों ने साहित्य और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश देते हुए वृक्षारोपण किया। इस अवसर पर मुजफ्फरपुर स्थित पाई संस्थान में एक भव्य कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया।

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर विधायक श्री रंजन कुमार तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में एम. एस. केशरी पब्लिकेशन की संस्थापिका सुश्री मुस्कान केशरी एवं पाई संस्थान के संस्थापक इंजी. विशाल कुमार मंचासीन रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं सरस्वती वंदना का दायित्व मुस्कान केशरी एवं सुजाता शर्मा ने निभाया।

 

 

कवि सम्मेलन में आमंत्रित कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति देने वालों में पियूष कुमार आशु, विवेक कुमार, विवेक वशिष्ठ, प्रतोष कुमार, सुजाता शर्मा, शिल्पा श्रीवास्तव, सदैव सौरभ, तुषार कुमार, अमीर हमजा, प्रयास तिवारी, दीपा श्रीवास्तव, डॉ. फैज़ शाकिर, अचानक ईश्वर, राज कुमार राज एवं रिषु कुमारी प्रमुख रहे।

 

कार्यक्रम के दौरान सभी आमंत्रित रचनाकारों को सम्मान-पत्र, अंगवस्त्र एवं साहित्यिक पत्रिका भेंट कर सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में संस्थापिका मुस्कान केशरी ने सभी साहित्यकारों, अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने का सशक्त माध्यम है।

 

उल्लेखनीय है कि एम. एस. केशरी पब्लिकेशन द्वारा एकल एवं साझा काव्य-संकलनों का प्रकाशन किया जाता है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक माह दो दिवसीय काव्यगोष्ठी, साहित्यिक जुगलबंदी, साक्षात्कार, कविता एवं वीडियो प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है, जिनमें देश के विभिन्न राज्यों से साहित्यकार सक्रिय सहभागिता निभाते हैं।

 

इस आयोजन की सफलता पर युवा साहित्यकार कुमार संदीप ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि “मुस्कान केशरी नारी शक्ति की प्रेरणादायक मिसाल हैं। वे जिले की अनमोल साहित्यिक निधि हैं, जो निरंतर साहित्य सेवा के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रही हैं। उनका समर्पण और साहित्य के प्रति प्रतिबद्धता अत्यंत सराहनीय है।”

 

कार्यक्रम ने साहित्य, संस्कृति एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरण का एक प्रेरणादायी संदेश दिया तथा उपस्थित सभी प्रतिभागियों के मन में साहित्य के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया।

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