BRABU News, Muzaffarpur: पूजा बोस ने बताया कि इंटर परीक्षा में वीक्षक की भूमिका निभाने के कारण कुछ समय के लिए विद्यालय में बच्चों के साथ प्रत्यक्ष रूप से पठन-पाठन करना संभव नहीं हो पाया।किंतु एक शिक्षिका का दायित्व केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और उनसे शैक्षणिक व भावनात्मक जुड़ाव बना रहे, इसी संकल्प के साथ वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में पूजा बोस ने ऑनलाइन पठन-पाठन की पहल की।
इस पहल की शुरुआत से पहले शिक्षिका बोस ने बच्चों के अभिभावकों से संवाद स्थापित किया। उनके साथ मिलकर व्हाट्सएप ग्रुप के लिए एक निश्चित समय निर्धारित किया तथा उन्हें इस प्रक्रिया के प्रति जागरूक किया। चूँकि कई अभिभावकों के पास व्यक्तिगत या बड़े एंड्रॉइड मोबाइल उपलब्ध नहीं थे, इसलिए उन्हें पूजा बोस ने प्रेरित किया कि एक अभिभावक के मोबाइल के माध्यम से चार-पाँच बच्चों को एक साथ जोड़कर पढ़ाई कराई जाए। इस सहयोगात्मक प्रयास से सात-आठ अभिभावकों की सहभागिता में पूरी कक्षा के बच्चे समूह बनाकर व्हाट्सएप के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़ सके।
प्रतिदिन शाम को ऑनलाइन कक्षाओं का नियमित संचालन किया जा रहा है शिक्षिका पूजा बोस द्वारा। इस प्रक्रिया के माध्यम से बच्चों को यह भी सीखला रही है पूजा बोस कि मोबाइल का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा के एक सशक्त माध्यम के रूप में भी किया जा सकता है। बच्चों को उन्होंने सीखलाया कि मोबाइल का सदुपयोग किस समय, किस उद्देश्य और किस सीमा तक किया जाना चाहिए। इससे बच्चों में समय प्रबंधन, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हुई।
इस सतत और सुनियोजित प्रयास से बच्चों का पाठ्यक्रम समय पर पूर्ण होता रहा, उनकी सीखने की निरंतरता बनी रही और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई। साथ ही अभिभावकों में शिक्षा के प्रति विश्वास और विद्यालय के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण मजबूत हुआ। बच्चों की सक्रिय सहभागिता, उनकी जिज्ञासा और सीखने की प्रगति देखकर मन को गहरा आत्मसंतोष और सुकून मिला।
पूजा बोस ने कहा कि सच ही कहा गया है—जब शिक्षक समर्पण, संवेदना और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है, तब हर परिस्थिति में शिक्षा की लौ प्रज्ज्वलित रहती है और हर बच्चा आगे बढ़ता है।
पूजा बोस
प्राथमिक विद्यालय जनकबाग कुल्लाखास कस्बा,पूर्णिया




