BRABU News, Muzaffarpur News: हरियाणा की धरती से निकलकर हिंदी साहित्य की दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले साहित्यकार नफे सिंह योगी मालड़ा को वर्ष 2026 का “हिंदी गौरव सम्मान” प्रदान किया गया है। यह सम्मान प्रतिष्ठित हिंदी साहित्यिक संस्था “साहित्य अर्पण” द्वारा हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान, निरंतर सृजनशीलता और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करने के लिए प्रदान किया गया है।
यह सम्मान केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं बल्कि उस सांस्कृतिक परंपरा की स्वीकृति है जो परिवार, समाज और साहित्य के बीच गहरे संबंधों को जीवित रखती है। नफे सिंह योगी मालड़ा की रचनाओं में ग्रामीण जीवन की सादगी, सैनिक जीवन का अनुशासन, मानवीय संवेदनाओं की गहराई और भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ी आत्मीयता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
नफे सिंह योगी मालड़ा, श्री बलबीर सिंह (पी.टी.आई.) और श्रीमती विजय देवी के सुपुत्र हैं तथा जिला महेंद्रगढ़ (हरियाणा) के निवासी हैं। उनके जीवन और साहित्यिक व्यक्तित्व के निर्माण में उनके परिवार की परंपराओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विशेष रूप से उनकी स्वर्गीय दादी माँ श्रीमती धर्मा देवी का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा। दादी माँ अपने क्षेत्र की प्रसिद्ध हरियाणवी लोकगीत गायिका थीं। गाँव में होने वाले विभिन्न पारंपरिक कार्यक्रम, जैसे कुआँ पूजन, होली के गीत, फागण और सावन के गीत, विवाह समारोह, छठी, रोट, कड़ाही, गृह प्रवेश तथा बेटी के मायके से ससुराल विदा होने के अवसर, इन सभी में उनके लोकगीतों की गूंज सुनाई देती थी।
बचपन में नफे सिंह योगी मालड़ा को अपनी दादी माँ के साथ लोकगीत गाने का विशेष शौक था। उस समय हरियाणा में कार्यक्रमों के अंत में गुड़ और बतासे बाँटने की परंपरा थी। बस इन्हीं गुड़, बतासों के लालच में उन्होंने दादी माँ के साथ गीत गाना शुरू किया, लेकिन यही शौक आगे चलकर उनके भीतर साहित्य और संस्कृति के प्रति गहरी लगन का कारण बना।
आज भी उनके द्वारा दादी माँ के साथ गाए गए कई गीत इंटरनेट और यूट्यूब पर उपलब्ध हैं, जो उस सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाते हैं। नफे सिंह योगी मालड़ा का साहित्यिक जीवन केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने परिवार में एक ऐसी परंपरा को जन्म दिया है जो साहित्य और परिवार दोनों को एक सूत्र में जोड़ती है। वे हर वर्ष 6 नवंबर को अपनी दादी माँ श्रीमती धर्मा देवी की पुण्यतिथि के अवसर पर अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर अपनी नई पुस्तकों का लोकार्पण एवं विमोचन समारोह आयोजित करते हैं।
उनका मानना है कि उनके दादा-दादी ने पूरे परिवार को प्रेम, भाईचारे और एकता के सूत्र में बाँधकर रखा था। एक समय ऐसा था जब परिवार में 10 से 12 बच्चे जिसमें पोते, भतीजे-भतीजियाँ, दोहते आदि एक साथ खेलते, पढ़ते और बड़े होते थे। दादा-दादी का सपना था कि यह परिवार हमेशा प्रेम और एकता के साथ अपनी पहचान बनाए। उसी भावना को जीवित रखने के लिए नफे सिंह योगी मालड़ा हर वर्ष परिवार के साथ पुस्तकों का विमोचन करते हैं।
नफे सिंह योगी मालड़ा अपनी साहित्यिक यात्रा का विशेष श्रेय अपने साहित्यिक गुरु आदरणीय डॉ. मनोज भारत जी को देते हैं। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से ही उन्होंने हिंदी साहित्य में निरंतर लेखन जारी रखा और अपनी पहचान स्थापित की। गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने कविता, कहानी, संस्मरण और विभिन्न साहित्यिक विधाओं में लगातार लेखन किया है। यही कारण है कि उनकी रचनाओं में संवेदना, अनुशासन और विचार की गहराई स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
नफे सिंह योगी मालड़ा की साहित्यिक यात्रा अत्यंत समृद्ध और प्रेरणादायक रही है। अब तक उन्होंने कुल 30 पुस्तकों का सृजन किया है। उनकी एकल संग्रह की प्रमुख पुस्तकें हैं1. देश की बात (2017), 2. मंजिल से पहले रुकना मत (2018), 3. मौत से मस्ती (2019), 4. कातिल कोरोना (2020), 5. ऐसे कैसे मर जाऊँगा (2021), 6. किसके बिन है कौन अधूरा (2022), 8. सबर किया है सबरी कि ज्यों (2023), 9. बारूद और भावनाएँ (2024), 10. जल्दी घर तुम आना बेटा (2025), 10. सूखा समंदर (2025) और 11. स्मृतियों का सिपाही (2026), इनके अतिरिक्त उन्होंने सांझा संकलनों की 19 पुस्तकों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिनमें:- 13 काव्य संग्रह, 3 कहानी संग्रह, 2 लघुकथा संग्रह,1 संस्मरण संग्रह शामिल हैं।
नफे सिंह योगी मालड़ा पिछले 25 वर्षों से हिंदी साहित्य की पत्र पत्रिकाओं में लगातार लिख रहे हैं। उनकी रचनाएँ देश के अनेक साहित्यिक मंचों और संस्थानों में प्रकाशित होती रही हैं। उनके साहित्यिक योगदान को देखते हुए देशभर के सैकड़ों साहित्यिक संस्थानों और समूहों द्वारा उन्हें अनेक बार सम्मानित और पुरस्कृत किया जा चुका है। नफे सिंह योगी मालड़ा अपनी सभी उपलब्धियों का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों, परिवारजनों और शुभचिंतकों को देते हैं।
वे विशेष रूप से अपने “डबल फर्स्ट फैमिली”, पी.सी. विंग परिवार और अपने गाँव की हवा, पानी, धूल और मिट्टी को भी नमन करते हैं। उनका मानना है कि इन्हीं तत्वों ने उन्हें शारीरिक शक्ति, मानसिक साहस और किसी भी कार्य को पूरा करने का आत्मविश्वास दिया। उनका कहना है कि अगर माँ सरस्वती का आशीर्वाद इसी प्रकार बना रहा तो वे जीवन भर अपने दादा-दादी की पुण्यतिथि पर परिवार के साथ पुस्तकों का लोकार्पण करते रहेंगे और उनकी स्मृतियों को सदा जीवित रखेंगे।
वर्ष 2026 का “हिंदी गौरव सम्मान” प्राप्त होना नफे सिंह योगी मालड़ा की साहित्यिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह सम्मान न केवल उनकी लेखनी की शक्ति को पहचान देता है बल्कि उस भावनात्मक और सांस्कृतिक विरासत को भी सम्मानित करता है जिसे वे अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवित रखते आए हैं। उनकी रचनाएँ आज भी पाठकों को यह संदेश देती हैं कि साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज की आत्मा का प्रतिबिंब होता है।




